चौपाल हमारे समाज की लघु संसद का रूप रही हैं.आज समाज में बढ़ते एकाकीपन के कारन इनका स्वरुप विकृत हो गया है. प्राचीन काल से ही भारतीय गणतंत्र के आधारस्तंभ के रूप में चौपालों की सराहनीय भूमिका रही है.चौपाल ग्राम-पंचायतों के मुख्यालय के रूप में कम करती थी जिनके अवशेष आज भी भारत के अधिकांश ग्रामों में उपस्थित है.
सरकार ग्राम न्यायलय को पुनः स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है जो एक सराहनीय कदम हो सकता है.इससे चौपालों को पुनर्जीवन मिल सकता है.
राजनीती में किसी भी स्तर पर सक्रिय लोगों के लिए चौपाल की महत्ता को समझना जरुरी है.
अतः चौपाल-चर्चा के विषयों को भी बारीकी से समझने की जरुरत है. चौपालों के माध्यम से समाज की बहुत सी कुरीतियों पर जोरदार प्रहार किया जा सकता है. अतः जरुरी है की चौपालों को संस्थागत रूप देकर पुनः प्रभावशाली बनाया जाये.
..सतवीर गुर्जर
सतवीर गुर्जर जी सही कह रहे हैं आप ..हम चौपाल संस्कृति को भूल गए है, इसीलिए ग्रामीण समाज में आज अनेक विकृतियाँ पैदा हो गई है..जरुरी है इस संस्कृति को पुनर्जीवन देना.
ReplyDeleteसतवीर गुर्जर जी सही कह रहे हैं आप ..हम चौपाल संस्कृति को भूल गए है, इसीलिए ग्रामीण समाज में आज अनेक विकृतियाँ पैदा हो गई है..जरुरी है इस संस्कृति को पुनर्जीवन देना.
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